तुम

मेरी दुनिया हो तुम ,मेरे जहान हो तुम।
मेरे साँसों में बसी मेरी जान हो तुम।
तुम्हारा ज़िक्र हर वक़्त होंटों से बयान होता है,
मेरी रूह हो तुम, मेरे अरमान हो तुम। ।

मंदिर की घंटी हो तुम, मस्जिद के अज़ान हो तुम।
खुदा के घर से आए हुए एक अज़ीज़ मेहमान हो तुम।
जिसे बार-बार पढ़ने का दिल करे,
वैसे एक फरमान हो तुम। ।

मेरे खुदा हो तुम, मेरे राम हो तुम।
मेरी गीता हो तुम, मेरे कुरान हो तुम।
जिसके बिना ज़िन्दगी मुमकिन नहीं,
मेरे लिए वो इन्सान हो तुम। ।

ईशा

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Isha Solomon

My writings take me to the world I am supposed to be in. They fill me with immense pleasure and praise my worthiness....
I write because it proves me right.

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