थिरक थिरक अब नाचे पायल

थिरक थिरक अब नाचे पायल,
छन छन शोर मचाए,
मोहे रंग भाए हरियाली के,
कोई पियरी प्रीत की लाए।

घड़- घड़ अब बादल गरजे,
बिजली भी कड़की जाए,
देख पिया कैसे सावन आयो,
मन नित झंकृत हो जाए।

स्याह से रंग गया बदरा देखो,
झड़ झड़ पात बहाए,
बरखा चूमे धरती की माटी,
रस प्रेम सुधा बरसाए।

चहक चहक अब पंछी गाए,
दूब भी उग उग जाए,
कैसे रंग भरे जीवन का पहिया,
पगडंडी पर बढ़ता जाए।

Kritika Gupta

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Apki Sakhi

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