रूह की बात

क्यों बेवजह परेशान है,

देख के सब हैरान है।

गलत के ख़िलाफ़ चुप न रह,

बोल ले कि अभी भी,

 बाकी तुझ में जान है।

 

क्यों बेवजह परेशान है,

देख के सब हैरान है।

सफर पे निकल तो सही,

बेशक मंजिल नहीं

अब आसान है।

क्यों बेवजह परेशान है,

देख के सब हैरान है।

जब करें सब नफरत की बात,

तो देना तुझे

अमन का पैगाम है।

क्यों बेवजह परेशान है,

देख के सब हैरान है।

बचा के रख अपनी ज़ात को,

क्योंकि गिरा हुआ तू जिससे वो

इंसान नहीं हैवान है।

क्यों बेवजह परेशान है,

देख के सब हैरान है।

इखतिताम से पहले कुछ

ऐसा कर जा कि सुकून से

देखे जो ऊपर आसमान है।

अब न होना तुझे बेवजह परेशान है,

कि अब क्यों न तू हैरान है।

श्वेता मेहता

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Shweta Mehta

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