कवारनटाइन

गर्मी गई वर्षा ऋतु आई,
कोरोना का रूप विकराल हुआ,
कोरोना से लड़ने में,
देश हमारा बेहाल हुआ।

क्वारंटाइन की नीति को,
जन अभियान बनाना है,
कोरोना रूपी राक्षस को,
अलग रह के भगाना है ।

राष्ट्र को बचाने हेतु,
क्वारंटाइन जरूरी है,
जब तक वैक्सीन ना आ जाए,
यह अभियान मजबूरी है ।

रुखा सुखा खा लेंगे हम,
लेकिन चैन करो ना का तोड़ेंगे,
जीत हार तो लगा रहता है,
लेकिन लड़ना ना छोड़ेंगे ।

हार मानने की फितरत नहीं हमारी,
युद्ध जो एक बार छेड़ दिया,
जब तक विजय ना हो जाए,
तब तक लडना ना छोड़ा है ।

निश्चय कर आगे बढ़ो तुम,
अभियान 2 गज दूरी का,
इस अभियान को सफल बनाना है,
करोना को देश से भगाना है ।

 

विकाश

Advertisements

About the author

Vikash

मैं अपने संस्कृति को दुनिया तक पहुंचने के लिए कविता को एक जरिया बना रहा हु जिससे दुनिया के लोग हिंदुस्तान के संस्कृति को अच्छे से समझ सके।

View all posts

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.