आम

ग्रीष्म ऋतु ढलते ही
मीठास आम में आई है
फलों के राजा आम ने
खुशबू अपनी महकाइ है ।

जर्दा सबुजा और मालदेव ने
हाजिरी हाटो में लगाई है
इनकी मिठास की बात न पूछो
सबके मन को ललचाइ है ।

खट्टे मीठे आमो ने
खूब तरक्की पाई है
आचार मुरब्बा और चटनी ने
हर घर में उपस्थिति दर्ज कराई है ।

सारे व्यंजनों को छोड़कर
सबने इनमें प्रीत लगाई है
मानो जग की सारी मिठास
आम में ही समाई है ।

विकाश कुमार

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About the author

Vikash

मैं अपने संस्कृति को दुनिया तक पहुंचने के लिए कविता को एक जरिया बना रहा हु जिससे दुनिया के लोग हिंदुस्तान के संस्कृति को अच्छे से समझ सके।

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