गज़ल

मधुर आंखों की अदा,
मीठी शरबत सी मुस्कान,
झलक तुम्हारी पाने को,
तुम्हें पूजू सुबह शाम।

एक बार तू आजा,
प्रेम की अमृत छलका जा,
मैं सूखा खेत सा,
तुम काली घटा।

जल बिन प्यासी भंवरे का,
प्यास तो बुझा जा,
एक बार तू आजा,
बरसात की याद तो दिला जा।

जल्द करो वरना,
जल बिन मछली मर ना जाए,
तुम्हारी यादों की अंधेरे में,
आस अब टूटी जाए।

 

विकाश

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Vikash

मैं अपने संस्कृति को दुनिया तक पहुंचने के लिए कविता को एक जरिया बना रहा हु जिससे दुनिया के लोग हिंदुस्तान के संस्कृति को अच्छे से समझ सके।

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