एक आखरी बार

बस एक आखरी बार तू मेरे हाथ को अपने हाथों में रहने दे,

जो खुद से न कह पाई,आज तक भी, आज आखरी बार मुझे कहने दे

 

माना की हाथ की लकीरों ने रास्ते दो अलग हमारे बनाये हैं,

पर ऐसे न तोड़ उन सपनों को जो मैंने तेरे संग सजाए हैं।

 

तुझे पाने की ज़िद न सही, पर अपना बनाने की ख्वाहिश सदा है,

किस डोर से बंधी हूँ तुझसे, ये नहीं मालूम,

या यूँ कह लो कि प्यार ही तुमसे कुछ बेवजह सा है।

 

तू पास न सही पर प्यार तुझसे बेशुमार रहेगा,

बंद लबों पे मोहब्बत का इक़रार सदा रहेगा,

एक दूसरे की नज़रों से दूर भले रहेंगे हम,

पर इन आखों में तुझे देखने का इंतजार सदा रहेगा।

 

दुनिया की जंजीरों में क़ैद जरूर हो गये हैं,

पर हम दोनों को जोड़ने वाला एहसास मत तोड़ना,

जैसे लिया जाता है कान्हा संग नाम राधा का,

ए खुदा कुछ इस तरह से, तू नाम हमारा जोड़ना।

 

Aashna

About the author

Aashna

Not a writer, just a wanderer trying to pen down something which could be relatable to all of us. Having no experience in writing, just trying to dive deep into this new world and sharing a hand with those trying to understand life with all its complexities. We share & we grow together.

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