गंगाजल

प्राण दायिनी मां गंगा की
गाथा आज सुनाता हूं
गंगा के निर्मल जल का
सद्गुण तुम्हें बताता हूं ।

हिमालय से निकली गंगा
हिंदुस्तान की प्राणधारा है
गंगा के पावन जल से ही
देश हमारा उजियारा है ।

अपने स्वार्थ के कारण तुम
गंगा में विष ना मिलाओ
जल प्रदूषित हो गया तो
भविष्य को तुम भूल ही जाओ ।

अब हमारे पापों का
परिणाम न जाने कैसा होगा
गंगा अगर लुप्त हुई तो
बूंद बूंद को देश तरसेगा ।

बिन पानी जिंदगी क्या
मछली से पूछो आअो
अपने जड़ को जानकर तुम
गंगा को स्वच्छ बनाओ ।

फैक्ट्रियों की गंदगी को
यू ना गंगा में बहाओ
जल प्रदूषित ना हो गंगा की
बचाने का उपाय सुझावो ।

विकाश कुमार

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Vikash

मैं अपने संस्कृति को दुनिया तक पहुंचने के लिए कविता को एक जरिया बना रहा हु जिससे दुनिया के लोग हिंदुस्तान के संस्कृति को अच्छे से समझ सके।

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