बेटी

क्या होती है बेटी जग को बताता हूं
बेटी की सेवा का गाथा सुनाता हूं
मां-बाप के आंगन की फुल है बेटी
इस दुनिया के निर्माण की समूल है बेटी

मां और बाप की संसार है बेटी
रणचंडी दुर्गा की अवतार है बेटी
इस जग में भगवान का
अनमोल वरदान है बेटी

बेटी को तड़पाने वाले होश में आ जाओ
अपने स्वाभिमान की रक्षा खातिर
जब बेटी तलवार उठाती है
बड़े-बड़े योद्धा को धूल चटाती .है

पर इस समाज की सोच को
जाने क्या हो जाती है
बेटी को न्याय दिलाने खातिर
क्यू मां दर-दर ठोकर खाती है

निश्चय करो और आगे बढ़ो
अन्याय ना बेटी के साथ होने पाए
अगर किसी ने अन्याय किया तो
वह दुष्ट ना जिंदा रहने पाए

बेटी ना बची तो कुछ ना बचेगा
ना बचेगा जीवन हमारा
जीवन तो बस थम ही जाएगा
रह जाएगा अंधियारा

विकास

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Vikash

मैं अपने संस्कृति को दुनिया तक पहुंचने के लिए कविता को एक जरिया बना रहा हु जिससे दुनिया के लोग हिंदुस्तान के संस्कृति को अच्छे से समझ सके।

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