रूक गया तु क्यों

रूक गया तु क्यों, अरे थम गया तु क्यों 

हैरान हो रहा है, ऐसे जम गया तु क्यों

वक़्त का प्रवाह, है तेरे रक्त का प्रवाह 

कम हो गया है यूँ, कम हो गया है क्यों

सशक्त कर इसे, अब हर वक्त कर इसे 

वीर है तु फिर शव बन गया है क्यों। 

About the author

Shivani Sharma

Student by profession and learner by obsession. I admire writings just like an orchestra craves for its symphony. I believe what can't be said should better be penned down.

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