मिजाज

सुनी सानी दुनिया हो गई
मौसम का हाल रवानी है .
मौन पड़ी राहों में
ना जाने कब पथिक दिखानी है ।

चिलचिलाती गर्मी में
परिंदों का हाल बेगानी है .
घर में दुबक गई है दुनिया
मानो जहां में अंधेरा छाई है ।

संस्कारों में उत्थान हो गया
कहां परंपरा किसी ने निभानी है
नवयुवकों को समझाने की कोशिश
अब लगता है बेमानी है ।

विकाश कुमार

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Vikash

मैं अपने संस्कृति को दुनिया तक पहुंचने के लिए कविता को एक जरिया बना रहा हु जिससे दुनिया के लोग हिंदुस्तान के संस्कृति को अच्छे से समझ सके।

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