पहली चाहत

एक लड़का एक लड़की को
जानू कह बुलाता था
बिना याद किए उसको
खाना तक ना खाता था

प्यार में डूबी लड़की भी
दिल उसका बहलाती थी
कोई ना कोई बहाना कर
रोज उससे मिलने आती थी ।

प्यार का परवान चढ़ा
बात शादी तक आ पहुंची
घर वालों को मनाने की
कोशिश सारी व्यर्थ हुई ।

साथ जीने मरने की कसमें खाके
घर को दोनों ने छोड़ दिया
शहर छोड़ भाग गए दोनो
सब रिश्ते नाते तोड़ दिया ।

अनजाने शहर में घर
अपना बसाने चले
कभी फूलों पर चलने वाले
कांटो पर चलने लगे।

घरवालों ने प्यार पे इनकी
सहमति अपनी दी होती
महलों में पलने वालों की
ये न कभी दुर्गति होती ।

विकाश कुमार

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Vikash

मैं अपने संस्कृति को दुनिया तक पहुंचने के लिए कविता को एक जरिया बना रहा हु जिससे दुनिया के लोग हिंदुस्तान के संस्कृति को अच्छे से समझ सके।

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